
जातक की कुंडली में राहु और केतु के बीच में बाकी सभी ग्रह स्थित हो तब कालसर्प दोष का निर्माण होता हैं।

विवाह विलम्ब, मंगल दोष, वैधव्य दोष या विष योग हेतु अनुष्ठान

मृत्युंजय मंत्र जाप एवं अनुष्ठान

भगवान् मंगलनाथ एवं अंगारेश्वर पर भात पूजन

रुद्राभिषेक अर्थात भूतभावन शिव का अभिषेक

नागबलि नारायण बलि अनुष्ठान
